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  • डॉ खान ने मगध यूनिवर्सिटी के डिग्री कॉलेज में प्राचीन इतिहास और पुरातत्व विभाग की अध्यक्षता की, जहां से वे 2005 में अवकाश प्राप्त हुईं। 1964 में पटना कॉलेज से स्नातक, और 1966 में पटना विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास और पुरातत्व में स्नातकोत्तर करने के बाद, डॉ खान ने 1996 में, ‘मिथिला : एक सांस्कृतिक अध्ययन’ पर पीएचडी किया।

  • डॉ खान हिंदी और मैथिली साहित्य की एक पुरस्कृत लेखिका हैं, जिन्होंने ४० से अधिक उपन्यास, नाटक, और कहानियाँ प्रकाशित की हैं।

हिंदी

लेखनी

८ कथा संग्रह-विवश विक्रमादित्य, दुबधान, कास वन, गिलि पांक, जनम अवधि, घर से घर तक, दस प्रतिनिधि कहानियाँ... उपन्यास-रतनारे नयन, सिरजनहार, अगन हिंडोला...

और

लेखनी

कथा संग्रह - काँचहि बांस, उपन्यास हसीना मंज़िल, अनुत्तरित प्रश्न, दूर्वाक्षत,भामती...

और

मैथिली

लेख